NEFT, RTGS, IMPS में क्या फर्क है – कौनसा कब Use करें?

पैसे ट्रांसफर करने बैठे और बैंकिंग ऐप में तीन ऑप्शन आ गए – NEFT, RTGS, IMPS। ज्यादातर लोग बिना सोचे समझे किसी भी एक पर क्लिक कर देते हैं। पैसे तो वैसे भी आ ही जाते हैं, तो क्या फर्क पड़ता है?

असल में इससे फर्क पड़ता है। सही ऑप्शन चुनने से पैसे जल्दी पहुंचते हैं, कई बार चार्ज भी बच जाता है। इस आर्टिकल में तीनों के बीच का फर्क एकदम सिंपल भाषा में समझाऊंगा।

NEFT क्या है?

NEFT का फुल फॉर्म है National Electronic Funds Transfer। RBI ने इसे November 2005 में लॉन्च किया था। ये बैंक टू बैंक ट्रांसफर का एक पुराना और भरोसेमंद तरीका है।

NEFT में पैसे बैचेस में ट्रांसफर होते हैं, मतलब आपने ट्रांजैक्शन किया तो वो तुरंत नहीं जाएगा, बल्कि अगले बैच में प्रोसेस होगा। RBI के अनुसार ये बैचेस हर आधे घंटे में चलते हैं, यानी दिन में 48 बैचेस। December 2019 से RBI ने NEFT को 24×7 कर दिया है, पहले ये सिर्फ बैंकिंग आवर्स में चलता था।

NEFT में कोई मिनिमम लिमिट नहीं है। RBI की गाइडलाइंस के मुताबिक ₹1 से लेकर कितना भी अमाउंट भेज सकते हो, कोई मैक्सिमम लिमिट नहीं है। पैसा आमतौर पर 30 मिनट से 2 घंटे में पहुंच जाता है।

RTGS क्या है?

RTGS मतलब Real Time Gross Settlement। RBI ने इसे March 2004 में शुरू किया था और ये लार्ज वैल्यू ट्रांजैक्शन्स के लिए तैयार किया गया है।

NEFT में जहां बैचेस में पैसे जाते हैं, RTGS में हर ट्रांजैक्शन individually और real-time में प्रोसेस होता है। “Gross Settlement” का मतलब है कि हर ट्रांजैक्शन अलग से सेटल होता है, किसी दूसरे ट्रांजैक्शन के साथ नेट ऑफ नहीं होता।

RTGS की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिनिमम लिमिट है। RBI के अनुसार RTGS में कम से कम ₹2 लाख का ट्रांजैक्शन करना जरूरी है। हालाँकि मैक्सिमम की कोई लिमिट नहीं है। December 2020 से RBI ने RTGS को भी 24x7x365 कर दिया है, इससे पहले ये सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक ही अवेलेबल था।

IMPS क्या है?

IMPS का मतलब है Immediate Payment Service, ये तीनों में सबसे फास्ट है और इंस्टेंट ट्रांसफर के लिए बनाया गया है।

IMPS में पैसा सेकंड्स में ट्रांसफर हो जाता है, NPCI के अनुसार 99% से ज्यादा IMPS ट्रांजैक्शन्स 10 सेकंड के अंदर कम्प्लीट हो जाते हैं और ये शुरू से ही 24x7x365 अवेलेबल है।

IMPS में कोई मिनिमम लिमिट नहीं है लेकिन मैक्सिमम लिमिट बैंक पर डिपेंड करती है। RBI ने ऑफिशियली IMPS की पर-ट्रांजैक्शन लिमिट ₹5 लाख रखी है, लेकिन कुछ बैंक्स अपनी पॉलिसी के हिसाब से ₹2 लाख तक ही अलाउ करते हैं।

NEFT vs RTGS vs IMPS

FeatureNEFTRTGSIMPS
Operated ByRBIRBINPCI
Settlement TypeBatch-wiseReal-timeInstant
Speed30 min – 2 hrs10–30 minSeconds
Minimum Amount₹1₹2 lakh₹1
Maximum AmountNo limitNo limit₹5 lakh
Charges₹2.5–25₹25–50Bank-wise
Availability24×724×724×7

कौनसा कब यूज़ करें

  • IMPS: जब आपको तुरंत पैसे भेजने हों भले ही रात के 2 बजे हों या छुट्टी का दिन हो। यह छोटी रकम (जैसे ₹50,000) के लिए सबसे सूटेबल है जो तुरंत खाते में जमा हो जाती है।
  • NEFT: जब पैसा तुरंत पहुंचना ज़रूरी न हो लेकिन कुछ घंटों के भीतर पहुंच जाए तो आप NEFT यूज़ कर सकते है और अक्सर ये मुफ्त होता है।
  • RTGS: जब आपको बड़ी रकम (₹2 लाख से ज्यादा) बहुत सेफ और जल्दी भेजनी हो।

UPI और IMPS में क्या रिलेशन है?

UPI (Unified Payments Interface) जो आप Google Pay, PhonePe या Paytm में यूज़ करते हो, वो IMPS के infrastructure पर ही काम करता है। NPCI ने UPI को April 2016 में लॉन्च किया था।

जब आप UPI से पैसे भेजते हो, बैकेंड में IMPS का सिस्टम ही यूज़ होता है। फर्क ये है कि UPI में अकाउंट नंबर और IFSC की जरूरत नहीं पड़ती, सिर्फ UPI ID या QR कोड से काम हो जाता है।

UPI की पर-ट्रांजैक्शन लिमिट ₹1 लाख है (कुछ कैटेगरीज़ में ₹2 लाख), जबकि डायरेक्ट IMPS से ₹5 लाख तक भेज सकते हो।

बेनिफिशियरी ऐड करने का प्रोसेस

NEFT और RTGS में पहली बार किसी को पैसे भेजने से पहले बेनिफिशियरी ऐड करनी पड़ती है। इसके लिए तीन चीजें चाहिए – बेनिफिशियरी का नाम, अकाउंट नंबर और IFSC कोड।

ज्यादातर बैंक्स सिक्योरिटी के लिए नई बेनिफिशियरी को एक्टिवेट होने में 30 मिनट से 24 घंटे का टाइम लेते हैं। कुछ बैंक्स जैसे ICICI और HDFC में instant beneficiary activation का ऑप्शन भी है, लेकिन उसमें इनिशियल ट्रांजैक्शन लिमिट कम होती है।

IMPS में भी बेनिफिशियरी ऐड कर सकते हो, या फिर मोबाइल नंबर और MMID (Mobile Money Identifier) से भी ट्रांसफर कर सकते हो।

गलत ट्रांसफर होने पर क्या करें?

अगर गलत अकाउंट में पैसे चले गए तो RBI की गाइडलाइन्स के मुताबिक तुरंत अपने बैंक को इन्फॉर्म करना चाहिए। उसके बाद बैंक beneficiary बैंक को रिक्वेस्ट भेजता है।

अगर जिसके अकाउंट में गलती से पैसे गए हैं वो एग्री करे तो पैसे वापस आ जाते हैं। नहीं तो लीगल प्रोसेस में जाना पड़ता है।

इसीलिए ट्रांसफर से पहले अकाउंट नंबर और IFSC हमेशा दोबारा वेरिफाई करो। कुछ बैंक्स जैसे SBI और HDFC अब “Beneficiary Name Verification” फीचर देते हैं जिससे ट्रांसफर से पहले पता चल जाता है कि अकाउंट किसके नाम पर है।

निष्कर्ष

तीनों मेथड्स अलग-अलग हालात के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। NEFT बैच-बेस्ड हैं और फ्री है, इसलिए नॉन-अर्जेंट ट्रांसफर्स के लिए सही है। RTGS ₹2 लाख से ऊपर के बड़े ट्रांजैक्शन्स के लिए बना है। IMPS सबसे फास्ट है और तुरंत ट्रांसफर के लिए यूज़ होता है। अब आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही ऑप्शन चुन सकते हो।

Disclaimer: urvarak.co.in पर दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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